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mahabharat 8.46.17: कर्ण भी अद्वितीय कवच, नूपुर और हार पहने हुए सेना के अग्रभाग की रक्षा करते हुए सेना के ठीक मध्य में खड़ा था॥17॥   |   mahabharat अध्याय 8.46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.46.17 
मध्ये सेनामुखे कर्णोऽप्यवातिष्ठत दंशित:।
चित्रवर्माङ्गद: स्रग्वी पालयन् वाहिनीमुखम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
कर्ण भी अद्वितीय कवच, नूपुर और हार पहने हुए सेना के अग्रभाग की रक्षा करते हुए सेना के ठीक मध्य में खड़ा था॥17॥
 
Wearing a unique armour, anklets and a necklace, Karna too was standing right in the centre of the formation, protecting the front of the army.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)