Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.46.14-15h: युद्ध-कुशल संशप्तक योद्धा, जो श्रीकृष्ण और अर्जुन को मारना चाहते थे, वीर रथी थे और युद्ध से कभी पीछे नहीं हटते थे। उनकी संख्या चौंतीस हज़ार थी। वे आपके पुत्रों के साथ रहकर सेना के बाएँ पार्श्व की रक्षा करते थे।   |   mahabharat अध्याय 8.46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  8.46.14-15h 
चतुस्त्रिंशत्सहस्राणि रथानामनिवर्तिनाम्।
संशप्तका युद्धशौण्डा वामं पार्श्वमपालयन्॥ १४॥
समन्वितास्तव सुतै: कृष्णार्जुनजिघांसव:।
 
 
अनुवाद
युद्ध-कुशल संशप्तक योद्धा, जो श्रीकृष्ण और अर्जुन को मारना चाहते थे, वीर रथी थे और युद्ध से कभी पीछे नहीं हटते थे। उनकी संख्या चौंतीस हज़ार थी। वे आपके पुत्रों के साथ रहकर सेना के बाएँ पार्श्व की रक्षा करते थे।
 
The war-skilled Samshaptaka warriors who wanted to kill Shri Krishna and Arjun were brave charioteers who never retreated from the battle. Their number was thirty-four thousand. They stayed with your sons and protected the left flank of the formation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)