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mahabharat 8.45.6-7: उस देश में वही बाहिक पहले ब्राह्मण, फिर क्षत्रिय बनता है। तत्पश्चात वैश्य और शूद्र बनता है। तत्पश्चात नाई बनता है। नाई बनने के पश्चात् वह पुनः ब्राह्मण बनता है। ब्राह्मण बनने के पश्चात् वह पुनः दास बनता है।*॥6-7॥   |   mahabharat अध्याय 8.45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  8.45.6-7 
तत्र वै ब्राह्मणो भूत्वा ततो भवति क्षत्रिय:।
वैश्य: शूद्रश्च वाहीकस्ततो भवति नापित:॥ ६॥
नापितश्च ततो भूत्वा पुनर्भवति ब्राह्मण:।
द्विजो भूत्वा च तत्रैव पुनर्दासोऽभिजायते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उस देश में वही बाहिक पहले ब्राह्मण, फिर क्षत्रिय बनता है। तत्पश्चात वैश्य और शूद्र बनता है। तत्पश्चात नाई बनता है। नाई बनने के पश्चात् वह पुनः ब्राह्मण बनता है। ब्राह्मण बनने के पश्चात् वह पुनः दास बनता है।*॥6-7॥
 
‘In that country the same bahik first becomes a Brahmin and then a Kshatriya. After that he becomes a Vaishya and a Shudra. After that he becomes a barber. After becoming a barber he again becomes a Brahmin. After becoming a Brahmin he again becomes a slave*॥ 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)