श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  8.45.47 
संजय उवाच
ततो दुर्योधनो राजा कर्णशल्याववारयत्।
सखिभावेन राधेयं शल्यं स्वाञ्जल्यकेन च॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन ! तब राजा दुर्योधन ने कर्ण और शल्य दोनों को रोक लिया। उसने मित्रतापूर्वक कर्ण को मना करने के लिए समझाया और हाथ जोड़कर शल्य को रोक लिया ॥47॥
 
Sanjay says- Rajan! Then King Duryodhana stopped both Karna and Shalya. He persuaded Karna to refuse in a friendly manner and stopped Shalya with folded hands. 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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