श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  8.45.46 
न कर्ण देशसामान्यात् सर्व: पापं निषेवते।
यादृशा: स्वस्वभावेन देवा अपि न तादृशा:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! जिस देश में रहने मात्र से सभी लोग पाप नहीं करते, उसी देश में लोग अपने उत्तम चरित्र और स्वभाव के कारण ऐसे महापुरुष बन जाते हैं कि देवता भी उनकी बराबरी नहीं कर सकते॥ 46॥
 
Karna! Just by living in a country all the people do not indulge in sins. In the same country due to their good character and nature people become such great men that even the gods cannot match them.॥ 46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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