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mahabharat 8.45.43: सब जातियों के पुरुष एक दूसरे से बातचीत करते हुए एक दूसरे को उपहास द्वारा दुःख पहुँचाते हैं और स्त्रियों के साथ मैथुन करते हैं ॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 8.45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  8.45.43 
रमन्ते चोपहासेन पुरुषा: पुरुषै: सह।
अन्योन्यमवतक्षन्तो देशे देशे समैथुना:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
सब जातियों के पुरुष एक दूसरे से बातचीत करते हुए एक दूसरे को उपहास द्वारा दुःख पहुँचाते हैं और स्त्रियों के साथ मैथुन करते हैं ॥ 43॥
 
Men of all nations, while talking to other men, hurt each other by ridicule and indulge in sexual intercourse with women. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)