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mahabharat 8.45.42: कर्ण! सर्वत्र ब्राह्मण हैं। सर्वत्र क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र हैं तथा सभी देशों में उत्तम व्रतों का पालन करने वाली पतिव्रता स्त्रियाँ हैं।   |   mahabharat अध्याय 8.45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  8.45.42 
सर्वत्र ब्राह्मणा: सन्ति सन्ति सर्वत्र क्षत्रिया:।
वैश्या: शूद्रास्तथा कर्ण स्त्रिय: साध्व्यश्च सुव्रता:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! सर्वत्र ब्राह्मण हैं। सर्वत्र क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र हैं तथा सभी देशों में उत्तम व्रतों का पालन करने वाली पतिव्रता स्त्रियाँ हैं।
 
Karna! Everywhere there are Brahmins. Everywhere there are Kshatriyas, Vaishyas and Shudras and in all countries there are pious women who follow the best vows. 42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)