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mahabharat 8.45.40: शल्य बोले, "कर्ण! जिस अंग देश का तुम्हें राजा बनाया गया है, वहाँ क्या होता है? जब कोई सगा-संबंधी रोगग्रस्त हो जाता है, तो उसे त्याग दिया जाता है। वहाँ के लोग अपनी ही स्त्री-बच्चों को खुले बाज़ार में बेच देते हैं।"   |   mahabharat अध्याय 8.45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  8.45.40 
शल्य उवाच
आतुराणां परित्याग: स्वदारसुतविक्रय:।
अङ्गे प्रवर्तते कर्ण येषामधिपतिर्भवान्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
शल्य बोले, "कर्ण! जिस अंग देश का तुम्हें राजा बनाया गया है, वहाँ क्या होता है? जब कोई सगा-संबंधी रोगग्रस्त हो जाता है, तो उसे त्याग दिया जाता है। वहाँ के लोग अपनी ही स्त्री-बच्चों को खुले बाज़ार में बेच देते हैं।"
 
Shalya said - Karna! What happens in the country of Ang where you have been made the king? When relatives are afflicted with diseases, they are abandoned. The people there sell their own wives and children in the open market.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)