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mahabharat 8.45.30: पांचाल, कौरव, नैमिष और मत्स्यदेश के निवासी धर्म को जानते हैं। उत्तर, अंग और मगधदेश के वृद्ध लोग शास्त्रों में वर्णित धर्म का आश्रय लेकर अपना जीवन व्यतीत करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 8.45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  8.45.30 
आ पाञ्चाल्येभ्य: कुरवो नैमिषाश्च
मत्स्याश्चैतेऽप्यथ जानन्ति धर्मम्।
अथोदीच्याश्चाङ्गका मागधाश्च
शिष्टान् धर्मानुपजीवन्ति वृद्धा:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
पांचाल, कौरव, नैमिष और मत्स्यदेश के निवासी धर्म को जानते हैं। उत्तर, अंग और मगधदेश के वृद्ध लोग शास्त्रों में वर्णित धर्म का आश्रय लेकर अपना जीवन व्यतीत करते हैं।
 
The residents of Panchal, Kaurava, Naimisha and Matsyadesha know the Dharma. The old men of Uttara, Ang and Magadhdes live their lives by taking shelter of the Dharmas mentioned in the scriptures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)