Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.45.29-30h: कृतघ्नता, दूसरे के धन की चोरी, मद्यपान, गुरुपत्नी के साथ व्यभिचार, कटुवचन बोलना, गोहत्या, रात्रि में घर से बाहर जाना और दूसरे के वस्त्रों का उपयोग करना - ये सब जिनका धर्म है, उन अरत्त और पंचनदवासियों के लिए अधर्म नाम की कोई वस्तु नहीं है। उन्हें धिक्कार है!॥29 1/2॥ | mahabharat अध्याय 8.45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृतघ्नता, दूसरे के धन की चोरी, मद्यपान, गुरुपत्नी के साथ व्यभिचार, कटुवचन बोलना, गोहत्या, रात्रि में घर से बाहर जाना और दूसरे के वस्त्रों का उपयोग करना - ये सब जिनका धर्म है, उन अरत्त और पंचनदवासियों के लिए अधर्म नाम की कोई वस्तु नहीं है। उन्हें धिक्कार है!॥29 1/2॥
Ingratitude, theft of other's wealth, drinking liquor, adultery with the wife of the Guru, use of harsh words, cow slaughter, going out of the house at night and using other's clothes - for those Arattas and Panchanad dwellers, whose religion is all these, there is no such thing as irreligion. Shame on them!॥29 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥