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mahabharat 8.45.25: मनुष्यों का मैल म्लेच्छ हैं, म्लेच्छों का मैल शराब बेचने वाले हैं, कलालों का मैल नपुंसक हैं और नपुंसकों का मैल राजपुरोहित हैं॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 8.45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  8.45.25 
मानुषाणां मलं म्लेच्छा म्लेच्छानां शौण्डिका मलम्।
शौण्डिकानां मलं षण्ढा: षण्ढानां राजयाजका:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
मनुष्यों का मैल म्लेच्छ हैं, म्लेच्छों का मैल शराब बेचने वाले हैं, कलालों का मैल नपुंसक हैं और नपुंसकों का मैल राजपुरोहित हैं॥ 25॥
 
‘The filth of human beings are the mlecchas, the filth of mlecchas are the liquor sellers, the filth of kalals are the eunuchs and the filth of eunuchs are the royal priests.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)