श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  8.45.23 
क्षत्रियस्य मलं भैक्ष्यं ब्राह्मणस्याश्रुतं मलम्।
मलं पृथिव्यां वाहीका: स्त्रीणां मद्रस्त्रियो मलम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रिय का मैल भिक्षावृत्ति है, ब्राह्मण का मैल वेद और शास्त्र के विरुद्ध आचरण है, पृथ्वी का मैल विदेशी हैं और स्त्रियों का मैल मद्र देश की स्त्रियाँ हैं।॥23॥
 
The filth of a Kshatriya is begging, the filth of a Brahmin is conduct contrary to the Vedas and Shastras, the filth of the Earth are the foreigners and the filth of women are the women of Madra country.'॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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