श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  8.45.21 
इति पाञ्चनदं धर्ममवमेने पितामह:।
स्वधर्मस्थेषु वर्षेषु सोऽप्येतान् नाभ्यपूजयत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
पितामह ब्रह्मा ने इस प्रकार पंचनद वासियों के धर्म का अनादर किया है। उन्होंने अपने-अपने धर्म परायण अन्य देशों के समान उनका सम्मान नहीं किया ॥ 21॥
 
Grandfather Brahma has disrespected the religion of the Panchanad residents in this way. He did not respect them as compared to other countries who are devoted to their own religion. ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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