Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.45.17: राजा शल्य! ऐसा जानकर आपको धर्म-शिक्षा से मुख मोड़कर जड़ पुरुष की भाँति चुपचाप बैठ जाना चाहिए। आप विदेशी प्रजा के राजा और रक्षक हैं, अतः उनके शुभ-अशुभ कर्मों का छठा भाग ग्रहण करते हैं॥ 17॥ | mahabharat अध्याय 8.45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं विद्वान् धर्मकथासु राजं-
स्तूष्णींभूतो जडवच्छल्य भूय:।
त्वं तस्य गोप्ता च जनस्य राजा
षड्भागहर्ता शुभदुष्कृतस्य॥ १७॥
अनुवाद
राजा शल्य! ऐसा जानकर आपको धर्म-शिक्षा से मुख मोड़कर जड़ पुरुष की भाँति चुपचाप बैठ जाना चाहिए। आप विदेशी प्रजा के राजा और रक्षक हैं, अतः उनके शुभ-अशुभ कर्मों का छठा भाग ग्रहण करते हैं॥ 17॥
King Shalya! Knowing this, you should sit quietly like an inert person, turning your face away from religious teachings. You are the king and protector of the people of foreign lands; hence you accept one-sixth of their good and bad deeds.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥