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mahabharat 8.45.15-16: विदेशी देशों के निवासियों को छोड़कर, प्रायः सर्वत्र ही कुलीन पुरुष पाए जाते हैं। मत्स्य से लेकर कुरु और पांचाल देश तक, नैमिषारण्य से लेकर चेदि देश तक, वहाँ रहने वाले सभी लोग कुलीन और सदाचारी हैं और प्राचीन धर्म का पालन करते हुए अपना जीवन निर्वाह करते हैं। मद्र और पंचनद क्षेत्रों में ऐसा नहीं है। वहाँ के लोग बेईमान हैं।'॥15-16॥   |   mahabharat अध्याय 8.45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  8.45.15-16 
नानादेशेषु सन्तश्च प्रायो बाह्यालयादृते॥ १५॥
आ मत्स्येभ्य: कुरुपञ्चालदेश्या
आ नैमिषाच्चेदयो ये विशिष्टा:।
धर्मं पुराणमुपजीवन्ति सन्तो
मद्रानृते पाञ्चनदांश्च जिह्मान्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
विदेशी देशों के निवासियों को छोड़कर, प्रायः सर्वत्र ही कुलीन पुरुष पाए जाते हैं। मत्स्य से लेकर कुरु और पांचाल देश तक, नैमिषारण्य से लेकर चेदि देश तक, वहाँ रहने वाले सभी लोग कुलीन और सदाचारी हैं और प्राचीन धर्म का पालन करते हुए अपना जीवन निर्वाह करते हैं। मद्र और पंचनद क्षेत्रों में ऐसा नहीं है। वहाँ के लोग बेईमान हैं।'॥15-16॥
 
‘Except for the residents of foreign lands, noble men are found almost everywhere. From Matsya to Kuru and Panchal lands, from Naimisharanya to Chedi lands, all those who reside there are noble and virtuous men and live their lives by following the ancient religion. This is not the case in Madra and Panchanad regions. The people there are dishonest.'॥15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)