Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.45.14-15h: कुरु, पांचाल, शाल्व, मत्स्य, नैमिष, कोसल, काशी, अंग, कलिंग, मगध और चेदि देशों के भाग्यशाली लोग सनातन धर्म को जानते हैं।' 14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  8.45.14-15h 
कुरव: सहपाञ्चाला: शाल्वा मत्स्या: सनैमिषा:।
कोसला: काशयोऽङ्गाश्च कालिङ्गा मागधास्तथा॥ १४॥
चेदयश्च महाभागा धर्मं जानन्ति शाश्वतम्।
 
 
अनुवाद
कुरु, पांचाल, शाल्व, मत्स्य, नैमिष, कोसल, काशी, अंग, कलिंग, मगध और चेदि देशों के भाग्यशाली लोग सनातन धर्म को जानते हैं।' 14 1/2॥
 
‘The fortunate people of Kuru, Panchala, Shalva, Matsya, Naimisha, Kosala, Kashi, Anga, Kalinga, Magadha and Chedi countries know the Sanatan Dharma.॥ 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)