Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.45.12-13h: मैं अभी बालक हूँ और मेरे भाई-बन्धु भी यहाँ उपस्थित हैं, फिर भी तुम लोगों ने मेरे साथ अधर्मपूर्वक सहवास किया है। इसलिए इस कुल की सभी स्त्रियाँ व्यभिचारिणी होंगी। हे दुष्टों! तुम इस घोर पाप से कभी मुक्त नहीं हो सकोगे।॥12 1/2॥ | mahabharat अध्याय 8.45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं अभी बालक हूँ और मेरे भाई-बन्धु भी यहाँ उपस्थित हैं, फिर भी तुम लोगों ने मेरे साथ अधर्मपूर्वक सहवास किया है। इसलिए इस कुल की सभी स्त्रियाँ व्यभिचारिणी होंगी। हे दुष्टों! तुम इस घोर पाप से कभी मुक्त नहीं हो सकोगे।॥12 1/2॥
I am still a child and my brothers and relatives are present, yet you people have had sexual intercourse with me in an unrighteous manner. Therefore all the women of this clan will be adulteresses. O wicked ones! You will never get rid of this grave sin.'॥12 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥