Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.45.1: कर्ण ने कहा- शल्य! जो बातें पहले कही जा चुकी हैं, उन्हें समझ लो। अब मैं तुम्हें पुनः कुछ कहता हूँ। मैंने जो कहा है, उसे एकाग्रचित्त होकर सुनो॥1॥   |   mahabharat अध्याय 8.45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 45: कर्णका मद्र आदि बाहीक-निवासियोंके दोष बताना, शल्यका उत्तर देना और दुर्योधनका दोनोंको शान्त करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.45.1 
कर्ण उवाच
हन्त शल्य विजानीहि हन्त भूयो ब्रवीमि ते।
उच्यमानं मया सम्यक् त्वमेकाग्रमना: शृणु॥ १॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा- शल्य! जो बातें पहले कही जा चुकी हैं, उन्हें समझ लो। अब मैं तुम्हें पुनः कुछ कहता हूँ। मैंने जो कहा है, उसे एकाग्रचित्त होकर सुनो॥1॥
 
Karna said- Shalya! Understand the things that have been told earlier. Now I am telling you something again. Listen to what I have said with full concentration.॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)