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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  8.44.6-7 
बहिष्कृता हिमवता गङ्गया च बहिष्कृता:।
सरस्वत्या यमुनया कुरुक्षेत्रेण चापि ये॥ ६॥
पञ्चानां सिन्धुषष्ठानां नदीनां येऽन्तराश्रिता:।
तान् धर्मबाह्यानशुचीन् वाहीकानपि वर्जयेत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जो क्षेत्र हिमालय, गंगा, सरस्वती, यमुना और कुरुक्षेत्र की सीमाओं से बाहर हैं तथा जो सतलुज, व्यास, रावी, चिनाब और झेलम - इन पाँचों और छठी सिंधु नदी के बीच स्थित हैं, उन्हें बाहीक कहते हैं। वे धर्म से बाहर हैं और अपवित्र हैं। उनका त्याग कर देना चाहिए।'
 
‘The regions which are outside the boundaries of Himalayas, Ganga, Saraswati, Yamuna and Kurukshetra and which are situated between the Sutlej, Vyas, Ravi, Chenab and Jhelum – these five and the sixth river Indus, are called Bahik. They are outside the religion and are impure. They should be abandoned.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)