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mahabharat 8.44.46: वे नीच ब्राह्मण न वेदों को जानते हैं, न यज्ञ करने के लिए कोई वेदिका है, न वे यज्ञ करते हैं। वे दासियों के साथ सहवास करने वाली व्यभिचारिणी स्त्रियों की संतान हैं और कर्मकाण्ड से रहित हैं; इसलिए देवता उनका भोजन स्वीकार नहीं करते।   |   mahabharat अध्याय 8.44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  8.44.46 
वेदा न तेषां वेद्यश्च यज्ञा यजनमेव च।
व्रात्यानां दासमीयानामन्नं देवा न भुञ्जते॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
वे नीच ब्राह्मण न वेदों को जानते हैं, न यज्ञ करने के लिए कोई वेदिका है, न वे यज्ञ करते हैं। वे दासियों के साथ सहवास करने वाली व्यभिचारिणी स्त्रियों की संतान हैं और कर्मकाण्ड से रहित हैं; इसलिए देवता उनका भोजन स्वीकार नहीं करते।
 
Those wretched Brahmins have no knowledge of the Vedas, nor are there any altars for performing sacrifices, nor do they perform sacrifices. They are the children of promiscuous women who have sex with slaves and are devoid of rituals; therefore, the gods do not accept their food.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)