श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  8.44.43 
कारस्करान्माहिषकान् कुरण्डान् केरलांस्तथा।
कर्कोटकान् वीरकांश्च दुर्धर्मांश्च विवर्जयेत्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
कारसकर, महिषक, कुराण्ड, केरल, कर्कोटक और विरक इन देशों के धर्म (आचरण) अशुद्ध हैं; अतः उन्हें त्याग देना चाहिए ॥ 43॥
 
The religions (behaviour) of the countries of Karsakar, Mahisaka, Kuranda, Kerala, Karkotaka and Viraka are impure; hence they should be abandoned. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)