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mahabharat 8.44.40-41h: जहाँ से ये पाँच नदियाँ निकलती हैं और बहती हैं, वह स्थान अरट्टा नाम से प्रसिद्ध बाहीक क्षेत्र है। वहाँ सज्जन व्यक्ति को दो दिन भी नहीं रुकना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 8.44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  8.44.40-41h 
पञ्च नद्यो वहन्त्येता यत्र नि:सृत्य पर्वतात्॥ ४०॥
आरट्टा नाम वाहीका न तेष्वार्योद्वॺहं वसेत्।
 
 
अनुवाद
जहाँ से ये पाँच नदियाँ निकलती हैं और बहती हैं, वह स्थान अरट्टा नाम से प्रसिद्ध बाहीक क्षेत्र है। वहाँ सज्जन व्यक्ति को दो दिन भी नहीं रुकना चाहिए।
 
The place from where these five rivers originate and flow is the famous Bahik region known as Aratta. A noble person should not stay there even for two days. 40 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)