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mahabharat 8.44.39-40h: ‘युगन्धर नगरी में दूध पीकर, अच्युतस्थल नामक नगरी में एक रात रहकर और पृथ्वी में स्नान करके मनुष्य स्वर्ग कैसे जा सकता है?’॥39 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  8.44.39-40h 
युगन्धरे पय: पीत्वा प्रोष्य चाप्यच्युतस्थले॥ ३९॥
तद्वद् भूतिलये स्नात्वा कथं स्वर्गं गमिष्यति।
 
 
अनुवाद
‘युगन्धर नगरी में दूध पीकर, अच्युतस्थल नामक नगरी में एक रात रहकर और पृथ्वी में स्नान करके मनुष्य स्वर्ग कैसे जा सकता है?’॥39 1/2॥
 
‘How can a man go to heaven after drinking milk in the city of Yugandhar, staying for a night in the city called Achyutasthal and taking a bath in the earth?’॥ 39 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)