श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  8.44.29-30h 
इति गायन्ति ये मत्ता: सीधुना शाकलाश्च ये॥ २९॥
सबालवृद्धा: क्रन्दन्तस्तेषु धर्म: कथं भवेत्।
 
 
अनुवाद
जो पुरुष, स्त्री, बालक और वृद्ध शाकल में निवास करते हैं और मदिरा के नशे में चूर होकर ऐसी कथाएँ गाते और चिल्लाते हैं, उनमें धर्म कैसे रह सकता है?॥29 1/2॥
 
How can religion remain in those men and women, young and old, who reside in Shakal and who, intoxicated by wine, shout and sing such tales?'॥ 29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)