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mahabharat 8.44.26-28h: वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित, गौमांस और गुड़ की मदिरा से तृप्त, मुट्ठी भर प्याज के साथ अनेक भेड़ों का मांस खाकर, मैं गोरी-चिट्टी लम्बी युवतियों के साथ इस शाकल नगरी में फिर कब ऐसी बाह्य कथाएँ गाऊँगा?   |   mahabharat अध्याय 8.44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा  »  श्लोक 26-28h
 
 
श्लोक  8.44.26-28h 
कदा वाहेयिका गाथा: पुनर्गास्यामि शाकले॥ २६॥
गव्यस्य तृप्ता मांसस्य पीत्वा गौडं सुरासवम्।
गौरीभि: सह नारीभिर्बृहतीभि: स्वलंकृता:॥ २७॥
पलाण्डुगंडूषयुतान् खादन्ती चैडकान् बहून्।
 
 
अनुवाद
वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित, गौमांस और गुड़ की मदिरा से तृप्त, मुट्ठी भर प्याज के साथ अनेक भेड़ों का मांस खाकर, मैं गोरी-चिट्टी लम्बी युवतियों के साथ इस शाकल नगरी में फिर कब ऐसी बाह्य कथाएँ गाऊँगा?
 
‘Adorned with clothes and ornaments, satiated by eating beef and drinking wine made of jaggery, eating many sheep with a handful of onions, when will I, along with fair-skinned tall young women, sing such external tales again in this Shakal city?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)