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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  8.44.24-25h 
इत्युक्त्वा ब्राह्मण: साधुरुत्तरं पुनरुक्तवान्॥ २४॥
वाहीकेष्वविनीतेषु प्रोच्यमानं निबोध तत्।
 
 
अनुवाद
शल्य! यह सब बातें कहकर उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने पुनः उपद्रवी बाहीकों के विषय में जो कहा था, वह भी मैं तुमसे कहता हूँ। सुनो - ॥24 1/2॥
 
Shalya! After telling all these things, that great Brahmin had said again about the unruly Bahikas, I will also tell you that. Listen - ॥24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)