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mahabharat 8.44.21-22h: रास्ते में आटे की लोइयां और सत्तू का तड़का खाकर हम बहुत बलवान हो जाएंगे और कई राहगीरों के कपड़े छीनकर उन्हें खूब पीटेंगे।'   |   mahabharat अध्याय 8.44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  8.44.21-22h 
अपूपान् सक्तुपिण्डांश्च प्राश्नन्तो मथितान्वितान्।
पथि सुप्रबला भूत्वा कदा सम्पततोऽध्वगान्॥ २१॥
चेलापहारं कुर्वाणास्ताडयिष्याम भूयस:।
 
 
अनुवाद
रास्ते में आटे की लोइयां और सत्तू का तड़का खाकर हम बहुत बलवान हो जाएंगे और कई राहगीरों के कपड़े छीनकर उन्हें खूब पीटेंगे।'
 
On the way, having become very strong after eating balls of flour and sattu with tadka, we shall snatch the clothes of many passers-by and beat them up thoroughly.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)