श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  8.44.2 
संजय उवाच
तथा ब्रुवन्तं परुषं कर्णो मद्राधिपं तदा।
परुषं द्विगुणं भूय: प्रोवाचाप्रियदर्शनम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! मद्रराज शल्य से ऐसे कठोर वचन कहकर कर्ण पुनः दुगनी कठोरता से अप्रिय वचन बोलने लगा।
 
Sanjaya says - O King! Having spoken such harsh words to Madra king Shalya, Karna again began speaking unpleasant words with twice the harshness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)