Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.44.14-15h: वे मद से उन्मत्त होकर एक दूसरे से मधुर और विनोदपूर्ण बातें करती हैं और एक दूसरे को 'अरे घायल! अरे मारी गई! अरे पति-हत्यारी!' आदि पुकारती हुई नाचती हैं। उत्सवों और उत्सवों के अवसर पर इन कुसंस्कारी स्त्रियों का संयमरूपी बाँध और भी टूट जाता है॥14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  8.44.14-15h 
आहुरन्योन्यसूक्तानि प्रब्रुवाणा मदोत्कटा:।
हे हते हे हतेत्येवं स्वामिभर्तृहतेति च॥ १४॥
आक्रोशन्त्य: प्रनृत्यन्ति व्रात्या: पर्वस्वसंयता:।
 
 
अनुवाद
वे मद से उन्मत्त होकर एक दूसरे से मधुर और विनोदपूर्ण बातें करती हैं और एक दूसरे को 'अरे घायल! अरे मारी गई! अरे पति-हत्यारी!' आदि पुकारती हुई नाचती हैं। उत्सवों और उत्सवों के अवसर पर इन कुसंस्कारी स्त्रियों का संयमरूपी बाँध और भी टूट जाता है॥14 1/2॥
 
‘Being mad with intoxication, they talk to each other with sweet and humorous talks and dance calling out to each other, ‘Oh wounded one! Oh slain one! Oh husband-killer!’ etc. On the occasion of festivals and celebrations, the dam of self-restraint of these uncultured women breaks even further.॥ 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)