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mahabharat 8.44.12: वहाँ की स्त्रियाँ, सुन्दर मालाएँ और श्रृंगार-सामग्री धारण करके, मदमस्त और नग्न होकर नगर की दीवारों और अपने घरों के चारों ओर नाचती-गाती रहती हैं॥12॥   |   mahabharat अध्याय 8.44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 44: कर्णके द्वारा मद्र आदि बाहीक देशवासियोंकी निन्दा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.44.12 
गायन्त्यथ च नृत्यन्ति स्त्रियो मत्ता विवासस:।
नगरागारवप्रेषु बहिर्माल्यानुलेपना:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ की स्त्रियाँ, सुन्दर मालाएँ और श्रृंगार-सामग्री धारण करके, मदमस्त और नग्न होकर नगर की दीवारों और अपने घरों के चारों ओर नाचती-गाती रहती हैं॥12॥
 
‘The women there, wearing visible garlands and cosmetics, drunkenly and naked, sing and dance around the walls of the city and their homes.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)