Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.43.6: हे मद्रनिवासी शल्य! कर्ण इस संसार में भयभीत होने के लिए नहीं पैदा हुआ है। मेरा जन्म तो केवल अपनी वीरता प्रदर्शित करने और अपनी कीर्ति फैलाने के लिए हुआ है। | mahabharat अध्याय 8.43: कर्णका आत्मप्रशंसापूर्वक शल्यको फटकारना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि कर्ण: समुद्भूतो भयार्थमिह मद्रक।
विक्रमार्थमहं जातो यशोऽर्थं च तथाऽऽत्मन:॥ ६॥
अनुवाद
हे मद्रनिवासी शल्य! कर्ण इस संसार में भयभीत होने के लिए नहीं पैदा हुआ है। मेरा जन्म तो केवल अपनी वीरता प्रदर्शित करने और अपनी कीर्ति फैलाने के लिए हुआ है।
O resident of Madra, Shalya! Karna was not born in this world to be afraid. I was born only to display my valour and spread my fame.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥