श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 43: कर्णका आत्मप्रशंसापूर्वक शल्यको फटकारना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  8.43.5 
नीचस्य बलमेतावत् पारुष्यं यत्त्वमात्थ माम्।
अशक्तो मद्‍गुणान् वक्तुं वल्गसे बहु दुर्मते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तूने मुझसे जो कठोर वचन कहे हैं, वे नीच पुरुष का बल हैं। हे मूर्ख! मेरे गुणों का वर्णन न कर पाने के कारण तू नाना प्रकार की व्यर्थ बातें बकता रहता है॥5॥
 
The harsh words you have spoken to me are the strength of a mean man. Foolish man! Being unable to describe my qualities, you keep on blabbering many nonsense things.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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