श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 43: कर्णका आत्मप्रशंसापूर्वक शल्यको फटकारना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.43.1 
संजय उवाच
तत: पुनर्महाराज मद्रराजमरिंदम:।
अभ्यभाषत राधेय: संनिवार्योत्तरं वच:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: महाराज! तत्पश्चात शत्रुओं का नाश करने वाले राधापुत्र कर्ण ने शल्य को रोककर पुनः उनसे इस प्रकार कहा-॥1॥
 
Sanjaya says: Maharaj! Thereafter, Radha's son Karna, the destroyer of enemies, stopped Shalya and spoke to him again like this -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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