श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  8.42.9 
अन्यत्र तस्मात् तव मृत्युकाला-
दब्राह्मणे ब्रह्म न हि ध्रुवं स्यात्।
तदद्य पर्याप्तमतीव चास्त्र-
मस्मिन् संग्रामे तुमुलेऽतीव भीमे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यह अस्त्र तुम्हारे मृत्युकाल को छोड़कर अन्य अवसरों पर ही काम आ सकता है; क्योंकि यह ब्रह्मास्त्र ब्राह्मण के अतिरिक्त अन्य किसी पुरुष में सदा स्थिर नहीं रह सकता।’ वह अस्त्र आज इस अत्यन्त भयानक और कोलाहलपूर्ण युद्ध में बहुत काम आ सकता है॥9॥
 
This weapon can be of use to you only on other occasions except at the time of your death; because this Brahmastra cannot remain stable forever in a person other than a Brahmin.' That weapon can be of great use today in this extremely terrifying and tumultuous battle.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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