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mahabharat 8.42.46: मैंने उस ब्राह्मण को अपना सारा धन और सब सुखों से युक्त समृद्ध घर आदरपूर्वक दे दिया; परंतु उसने कुछ भी लेना नहीं चाहा॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 8.42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  8.42.46 
ऋद्धं गृहं सर्वकामैर्यच्च मे वसु किंचन।
तत् सर्वमस्मै सत्कृत्य प्रयच्छामि न चेच्छति॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
मैंने उस ब्राह्मण को अपना सारा धन और सब सुखों से युक्त समृद्ध घर आदरपूर्वक दे दिया; परंतु उसने कुछ भी लेना नहीं चाहा॥ 46॥
 
I respectfully offered to that Brahmin all my wealth and a prosperous house full of all pleasures; but he did not wish to take anything.॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)