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mahabharat 8.42.34-35h: आज मेरे उत्तम ब्रह्मास्त्र, दिव्यास्त्र और मनुशास्त्र को देखो। इनसे मैं भयंकर पराक्रमी अर्जुन के साथ उसी प्रकार युद्ध करूँगा जैसे एक मदोन्मत्त हाथी दूसरे मदोन्मत्त हाथी से युद्ध करता है।   |   mahabharat अध्याय 8.42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  8.42.34-35h 
अस्त्राणि पश्याद्य ममोत्तमानि
ब्राह्माणि दिव्यान्यथ मानुषाणि॥ ३४॥
आसादयिष्याम्यहमुग्रवीर्यं
द्विपो द्विपं मत्तमिवातिमत्त:।
 
 
अनुवाद
आज मेरे उत्तम ब्रह्मास्त्र, दिव्यास्त्र और मनुशास्त्र को देखो। इनसे मैं भयंकर पराक्रमी अर्जुन के साथ उसी प्रकार युद्ध करूँगा जैसे एक मदोन्मत्त हाथी दूसरे मदोन्मत्त हाथी से युद्ध करता है।
 
Today look at my excellent Brahmastra, Divyastra and Manushastra. With these I will fight with the terrifyingly powerful Arjuna in the same manner as a very intoxicated elephant fights with another intoxicated elephant. 34 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)