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श्लोक 8.42.31-32h  |
मित्रं मिन्देर्नन्दते: प्रीयतेर्वा
संत्रायतेर्मिनुतेर्मोदतेर्वा॥ ३१॥
ब्रवीमि ते सर्वमिदं ममास्ति
तच्चापि सर्वं मम वेत्ति राजा। |
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| अनुवाद |
| मित्र शब्द मिद्, नन्द, प्रि, त्र, मि अथवा मुद* धातुओं के संयोग से बना है। मैं तुमसे सत्य कहता हूँ - इन सब धातुओं का पूर्ण अर्थ मुझमें विद्यमान है। राजा दुर्योधन इन सब बातों को भली-भाँति जानता है॥ 31 1/2॥ |
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| ‘The word mitra is formed by the fall of the metals Mid, Nand, Pri, Tra, Mi or Mud*. I tell you the truth – the full meaning of all these metals is present in me. King Duryodhana knows all these things very well.॥ 31 1/2॥ |
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