श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  8.42.3 
तौ चाप्यहं शस्त्रभृतां वरिष्ठौ
व्यपेतभीर्योधयिष्यामि कृष्णौ।
संतापयत्यभ्यधिकं नु रामा-
च्छापोऽद्य मां ब्राह्मणसत्तमाच्च॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों कृष्ण शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ हैं, फिर भी मैं उनसे निर्भय होकर युद्ध करूँगा। किन्तु परशुराम और एक ब्राह्मण से प्राप्त शाप आज मुझे महान पीड़ा दे रहा है।
 
Those two Krishnas are the best amongst the weapon bearers, yet I will fight them fearlessly. But the curse I have received from Parshuram and a Brahmin is causing me great pain today.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)