Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.42.27-28h: मैं इस युद्धभूमि में क्षत्रियों के साथ पाण्डुपुत्र अर्जुन के उत्साह का वर्णन बड़े हर्ष और आनंद के साथ कर सकता हूँ। तुम्हारा मन मूढ़ता से भरा हुआ है। तुम मूर्ख हो। फिर तुमने मुझसे अर्जुन के पुरुषार्थ का वर्णन करने के लिए हठ क्यों किया है?॥27 1/2॥ | mahabharat अध्याय 8.42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं इस युद्धभूमि में क्षत्रियों के साथ पाण्डुपुत्र अर्जुन के उत्साह का वर्णन बड़े हर्ष और आनंद के साथ कर सकता हूँ। तुम्हारा मन मूढ़ता से भरा हुआ है। तुम मूर्ख हो। फिर तुमने मुझसे अर्जुन के पुरुषार्थ का वर्णन करने के लिए हठ क्यों किया है?॥27 1/2॥
I can describe with great joy and delight the zeal of Arjuna, the son of Pandu, in this battlefield in the company of Kshatriyas. Your mind is full of foolishness. You are a fool. Then why have you stubbornly asked me to describe Arjuna's efforts?॥ 27 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥