Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.42.20-21h: मैं अपने महान शत्रु कुन्तीपुत्र अर्जुन को शान्त करूँगा, जो विषैले सर्प के समान भयंकर, तीखी दाढ़ी वाला, अविचल, अग्नि के समान शक्तिशाली और क्रोध से जलता हुआ है।’ 20 1/2॥ | mahabharat अध्याय 8.42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं अपने महान शत्रु कुन्तीपुत्र अर्जुन को शान्त करूँगा, जो विषैले सर्प के समान भयंकर, तीखी दाढ़ी वाला, अविचल, अग्नि के समान शक्तिशाली और क्रोध से जलता हुआ है।’ 20 1/2॥
I will pacify my great enemy Arjuna, son of Kunti, who is fierce like a poisonous snake with sharp beards, unpredictable, powerful like fire and burning with anger.' 20 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥