श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  8.42.19-20h 
वैश्वानरं धूमशिखं ज्वलन्तं
तेजस्विनं लोकमिदं दहन्तम्॥ १९॥
पर्जन्यभूत: शरवर्षैर्यथाग्निं
तथा पार्थं शमयिष्यामि युद्धे।
 
 
अनुवाद
जैसे प्रलयकाल का मेघ इस जगत् को जलाने वाली प्रचण्ड और प्रज्वलित धुँआधार शिखायुक्त संवर्त अग्नि को बुझा देता है, वैसे ही मैं मेघ बनकर युद्ध में बाणों की वर्षा द्वारा अग्निरूपी अर्जुन को शान्त कर दूँगा।॥19 1/2॥
 
Just as the cloud of Doomsday extinguishes the fiery and flaming smoky-crested Samvarta fire that burns this world, in the same way I, becoming a cloud, will calm Arjuna in the form of fire in the battle with a shower of arrows.' 19 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd