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mahabharat 8.42.16-17h: आज मैं उस वीर अर्जुन के साथ घोर युद्ध करूँगा, जिसे मैं युद्ध में किसी के समान नहीं मानता, जो हाथ में धनुष लेकर युद्धभूमि में देवताओं और दानवों को भी परास्त कर सकता है; तुम उसे अवश्य देखो॥16 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  8.42.16-17h 
अद्याहवे यस्य न तुल्यमन्यं
मन्ये मनुष्यं धनुराददानम्॥ १६॥
सुरासुरान् युधि वै यो जयेत
तेनाद्य मे पश्य युद्धं सुघोरम्।
 
 
अनुवाद
आज मैं उस वीर अर्जुन के साथ घोर युद्ध करूँगा, जिसे मैं युद्ध में किसी के समान नहीं मानता, जो हाथ में धनुष लेकर युद्धभूमि में देवताओं और दानवों को भी परास्त कर सकता है; तुम उसे अवश्य देखो॥16 1/2॥
 
Today I will have a fierce battle with that brave Arjuna, who I do not consider to be equal to anyone else in battle, who with a bow in his hand can defeat even the gods and demons on the battlefield; you must watch it.॥ 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)