Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.42.13-14h: ‘जलों का स्वामी, वह वेगवान और अनिश्चित समुद्र, बहुत से लोगों को डुबाने के लिए अपना महान वेग दिखाता है; परंतु तट की भूमि भी उस अनंत समुद्र को रोक लेती है ॥13 1/2॥ | mahabharat अध्याय 8.42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘जलों का स्वामी, वह वेगवान और अनिश्चित समुद्र, बहुत से लोगों को डुबाने के लिए अपना महान वेग दिखाता है; परंतु तट की भूमि भी उस अनंत समुद्र को रोक लेती है ॥13 1/2॥
‘The master of the waters, the swift and unpredictable ocean, shows its great speed to drown many people; But the land on the coast also stops that infinite ocean. 13 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥