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mahabharat 8.42.10: शल्य! मुझे विश्वास है कि यह घोर युद्ध, जो शूरवीरों को आकर्षित करने वाला, सर्वथा विनाशकारी और अत्यन्त भयंकर है तथा भरतवंशी क्षत्रियों के लिए घटित हुआ है, क्षत्रियवंश के श्रेष्ठ योद्धाओं को अवश्य ही पीड़ित करेगा॥10॥   |   mahabharat अध्याय 8.42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  8.42.10 
योऽयं शल्य भरतेषूपपन्न:
प्रकर्षण: सर्वहरोऽतिभीम:।
सोऽभिमन्ये क्षत्रियाणां प्रवीरान्
प्रतापिता बलवान् वै विमर्द:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
शल्य! मुझे विश्वास है कि यह घोर युद्ध, जो शूरवीरों को आकर्षित करने वाला, सर्वथा विनाशकारी और अत्यन्त भयंकर है तथा भरतवंशी क्षत्रियों के लिए घटित हुआ है, क्षत्रियवंश के श्रेष्ठ योद्धाओं को अवश्य ही पीड़ित करेगा॥10॥
 
Shalya! I am sure that this fierce battle which attracts the brave, is completely destructive and extremely fearful and has befallen the Kshatriyas of the Bharat dynasty will surely torment the foremost warriors of the Kshatriya race.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)