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mahabharat 8.41.84: जब अर्जुन अपने सैकड़ों बाणों से तुम्हारा अभिमान चूर-चूर कर देगा, तब तुम स्वयं देख लोगे कि तुममें और अर्जुन में कितना अन्तर है ॥84॥   |   mahabharat अध्याय 8.41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  8.41.84 
यदा शरशतै: पार्थो दर्पं तव वधिष्यति।
तदा त्वमन्तरं द्रष्टा आत्मनश्चार्जुनस्य च॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
जब अर्जुन अपने सैकड़ों बाणों से तुम्हारा अभिमान चूर-चूर कर देगा, तब तुम स्वयं देख लोगे कि तुममें और अर्जुन में कितना अन्तर है ॥84॥
 
When Arjuna shatters your pride with his hundreds of arrows, then you will see for yourself how much difference there is between you and Arjuna. ॥ 84॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)