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mahabharat 8.41.77: कर्ण! वहाँ तो कुन्तीपुत्र अर्जुन ने ही युद्धभूमि में चित्रसेन आदि गन्धर्वों को परास्त किया था और स्त्रियों सहित दुर्योधन को उनकी कैद से मुक्त कराया था।   |   mahabharat अध्याय 8.41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  8.41.77 
हत्वा जित्वा च गन्धर्वांश्चित्रसेनमुखान् रणे।
कर्ण दुर्योधनं पार्थ: सभार्यं सममोक्षयत्॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! वहाँ तो कुन्तीपुत्र अर्जुन ने ही युद्धभूमि में चित्रसेन आदि गन्धर्वों को परास्त किया था और स्त्रियों सहित दुर्योधन को उनकी कैद से मुक्त कराया था।
 
Karna! There it was Kunti's son Arjun who defeated the Gandharvas like Chitrasena on the battlefield and freed Duryodhan along with the women from their captivity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)