Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.41.7-10h: सम-विषम परिस्थितियाँ, सारथि का बल-दुर्बलता, सारथि सहित घोड़ों का निरन्तर परिश्रम और कष्ट, शस्त्रों का होना या न होना, पशु-पक्षियों द्वारा जय-पराजय का संकेत, भार, अधिक भार, शल्यक्रिया, शस्त्रों का प्रयोग, युद्ध तथा शुभ-अशुभ कारण - इन सब बातों को जानना मेरे लिए आवश्यक है; क्योंकि मैं इस रथ का सम्बन्धी हूँ। कर्ण! इसीलिए मैं पुनः तुमसे यह दृष्टान्त कह रहा हूँ-॥7-9 1/2॥ | mahabharat अध्याय 8.41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
समं च विषमं चैव रथिनश्च बलाबलम्।
श्रम: खेदश्च सततं हयानां रथिना सह॥ ७॥
आयुधस्य परिज्ञानं रुतं च मृगपक्षिणाम्।
भारश्चाप्यतिभारश्च शल्यानां च प्रतिक्रिया॥ ८॥
अस्त्रयोगश्च युद्धं च निमित्तानि तथैव च।
सर्वमेतन्मया ज्ञेयं रथस्यास्य कुटुम्बिना॥ ९॥
अतस्त्वां कथये कर्ण निदर्शनमिदं पुन:।
अनुवाद
सम-विषम परिस्थितियाँ, सारथि का बल-दुर्बलता, सारथि सहित घोड़ों का निरन्तर परिश्रम और कष्ट, शस्त्रों का होना या न होना, पशु-पक्षियों द्वारा जय-पराजय का संकेत, भार, अधिक भार, शल्यक्रिया, शस्त्रों का प्रयोग, युद्ध तथा शुभ-अशुभ कारण - इन सब बातों को जानना मेरे लिए आवश्यक है; क्योंकि मैं इस रथ का सम्बन्धी हूँ। कर्ण! इसीलिए मैं पुनः तुमसे यह दृष्टान्त कह रहा हूँ-॥7-9 1/2॥
Even and odd conditions, strength and weakness of the charioteer, continuous labour and pain of the horses along with the charioteer, knowing whether there are weapons or not, the sounds of animals and birds informing victory and defeat, load, overload, surgery, use of weapons, war and good and bad reasons - it is necessary for me to know all these things; because I am a relative of this chariot. Karna! That is why I am again narrating this parable to you-॥ 7-9 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥