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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  8.41.61 
शतमेकं च पातानां पताम्यहमनुस्मर।
श्लाघमानस्त्वमात्मानं काक भाषितवानसि॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
कौए! तूने अपनी प्रशंसा करते हुए कहा था कि तू एक सौ एक उड़ान भर सकता है। अब उसे याद कर।'
 
‘Crow! You had praised yourself by saying that you can fly in one hundred and one flights. Now remember them. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)