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mahabharat 8.41.54: कौआ! बताओ, तुम अभी जिस उड़ान में उड़ रहे हो उसका नाम क्या है? इस उड़ान में तुम बार-बार अपने पंखों और चोंच से पानी को छू रहे हो। 54.   |   mahabharat अध्याय 8.41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  8.41.54 
किं नाम पतितं काक यत्त्वं पतसि साम्प्रतम्।
जलं स्पृशसि पक्षाभ्यां तुण्डेन च पुन: पुन:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
कौआ! बताओ, तुम अभी जिस उड़ान में उड़ रहे हो उसका नाम क्या है? इस उड़ान में तुम बार-बार अपने पंखों और चोंच से पानी को छू रहे हो। 54.
 
Crow! Tell me, what is the name of the flight you are flying in right now? In this flight you are repeatedly touching the water with your wings and beak. 54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)