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mahabharat 8.41.49-50h: उधर हंस कुछ देर तक इधर-उधर देखकर और कौवे का इंतजार करते हुए उड़ता रहा, लेकिन आगे नहीं जा सका।   |   mahabharat अध्याय 8.41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना  »  श्लोक 49-50h
 
 
श्लोक  8.41.49-50h 
अथ हंसोऽप्यतिक्रम्य मुहूर्तमिति चेति च॥ ४९॥
अवेक्षमाणस्तं काकं नाशकद् व्यपसर्पितुम्।
 
 
अनुवाद
उधर हंस कुछ देर तक इधर-उधर देखकर और कौवे का इंतजार करते हुए उड़ता रहा, लेकिन आगे नहीं जा सका।
 
On the other hand, the swan kept flying for a while looking here and there and waiting for the crow but could not go further. 49 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)